मामला NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित मारपीट और अभद्रता का है। रितु बराला ने 19 अक्टूबर को जयपुर के मोती डूंगरी थाने में शिकायत देकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। आरोप है कि थाने में FIR दर्ज नहीं की गई और उन्हें पुलिस कमिश्नर से मिलने के लिए कहा गया। इसके बाद डोटासरा, विधायक रफीक खान, प्रताप सिंह खाचरियावास और अन्य कांग्रेस नेता कमिश्नरेट पहुंचे।
विरोध के बीच डोटासरा समेत कई नेता
नेताओं ने जीरो FIR दर्ज करने की मांग की और साफ कहा कि FIR दर्ज होने तक वे वहां से नहीं जाएंगे। विरोध के बीच डोटासरा समेत कई नेता कमिश्नरेट में ही रातभर बैठे रहे।
दरअसल, रितु बराला का आरोप है कि 13 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन बस में बैठाया और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन ले जाकर मारपीट की। उन्होंने बाल खींचने, थप्पड़ मारने और चोट पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और मामले में पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाकर FIR की मांग
अब सवाल यह है कि जब एक महिला प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाकर FIR की मांग कर रही है, तो शिकायत पर कार्रवाई को लेकर इतना विवाद क्यों? क्या अब इस मामले में FIR दर्ज होगी?